Sunday, June 5, 2011

परम शुन्य


न दिन हैं ,न रात ,
न सुबह न शाम ,
न होना ,न नहोना ,
इस शरीर को बेहद बैचैनी हैं ..
शरीर को कुछ समझ नहीं आता ....,
केवल अन्धेकार...........
इस अन्धेकार में कोई छवि नहीं ........
जीवित या मृत का बोध नहीं ...........
छवि केवल एक मृग्रिचिका हैं ..........
छवि हैं ही नहीं ...........
केवल शुन्यता हैं ...........
रौशनी की किरण तक यहाँ नहीं ,कोई आवाज़ नहीं ...

हरि ॐ तत सत

1 comment:

sunil said...

hari a..u..m tatsat...pranam Ma...